Wednesday, August 18, 2010

भीगी आखोँ से मुस्कूराने में मजा और भी है,
हसते हसते पलके भिगाने में मजा और भी है,
बात कहें तो कोई भी समझ लेता है,
खामोशी को कोई समझे तो मजा और भी है,