जाने क्या खौफ है ..इश्क बयां करने में
जाने क्या डर है ..इश्क निभाने में
जाने क्यू खामोश हो ..बातें दिल में दबाये बैठे हो
जो दर्द समंदर सा ...तन्हाई बनाकर रखे हो ...
लोग तो कांटे बिछाये बैठे है ..... तुम इश्क निभाना फूलोंके छाव में
लोग बातें बनाएंगे दिलोंके खिलाफ ...तुम ताल्लुक ना तोडना मेरी आस तोड़कर.
जाने क्या डर है ..इश्क निभाने में
जाने क्यू खामोश हो ..बातें दिल में दबाये बैठे हो
जो दर्द समंदर सा ...तन्हाई बनाकर रखे हो ...
लोग तो कांटे बिछाये बैठे है ..... तुम इश्क निभाना फूलोंके छाव में
लोग बातें बनाएंगे दिलोंके खिलाफ ...तुम ताल्लुक ना तोडना मेरी आस तोड़कर.
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